कठिन नहीं कोई भी काम, हर काम संभव है। मुश्किल लगे जो मुकाम, वह मुकाम संभव है - डॉ. पवनेश।

मुझे वह चुलबुली लड़की याद आती है

मुझे वह चुलबुली लड़की याद आती है

 

मुझे स्कूल के दिनों की

चौथे नंबर की बैंच पर बैठने वाली

वह चुलबुली लड़की याद आती है। 

 

उसका हंसना

उसका रोना

पन्ने पलटते हुए उसका

मुड़-मुड़ पीछे देखना

उसका हर अंदाज

उसकी हर बात याद आती है

मुझे वह चुलबुली लड़की याद आती है। 

 

उसका रूठना

उसका मनाना

हौले-हौले चलते हुए उसका

गीत गुनगुनाना

उसका हर भाव

उसकी हर अदा याद आती है

मुझे वह चुलबुली लड़की याद आती है। 

 

उसका लिखना

उसका पढ़ना

सहेली के बैग से उसका

टिफिन चुराना

उसका होने का एहसास

उसकी अमिट दोस्ती याद आती है। 

 

मुझे स्कूल के दिनों की

चौथे नंबर की बैंच पर बैठने वाली

वह चुलबुली लड़की याद आती है। 

 

©  Dr Pawanesh

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