साथियों, देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है। इसलिए हम सभी को सजग रहने की जरूरत है। वैक्सीन जरूर लगायें और कोविड नियमों का पालन करें। तभी हम स्वयं की व दूसरों की सुरक्षा कर पाने में सक्षम हो पायेेंगे।

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भारतीय संस्कृति में शंख, शंखों के प्रकार और उनका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

       माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा 22 मार्च की शाम 5 बजे ताली, थाल और शंख बजाने का आह्वान करने से एक बार पुनः ध्वनि विज्ञान प्रासंगिक हो उठा है। वस्तुतः शंख की ध्वनि को विज्ञान में हानिकारक कीटाणुओं व विषाणुओं का नाशक माना गया है। भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का मानना

नोवेल कोरोना वायरस ( Novel Coronavirus-Covid 19 )- विस्तृत जानकारी व बचाव के उपाय

नोवेल कोरोना वायरस  COVID-19         विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत, ब्रिटेन और अमरीका समेत कोरोना वायरस, कोविड 19 अब दुनिया के 150 देशों में फैल गया है और इसके कारण 8000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी घोषित किया है। भारत और अमरीका ने

उत्तराखंड के जलप्रपात ( Waterfalls of Uttarakhand )

 उत्तराखंड के जलप्रपात ( Waterfalls of Uttarakhand )  1. कैम्पटी जलप्रपात ( Kaimpty Waterfall )         कैम्पटी फॉल उत्तराखंड के टिहरी जनपद में मसूरी से 15 किमी की दूरी पर चकराता- यमुनोत्री मार्ग में स्थित है। इस झरने की ऊंचाई 14 मीटर है। यह जलप्रपात समुद्र तल से 1364 मीटर की ऊंचाई

उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान ( National Parks of Uttarakhand )

उत्तराखंड के राष्ट्रीय उद्यान  ( National Parks of Uttarakhand )         उत्तराखंड में वन्य जीव विहारों के समान ही कुल 6 राष्ट्रीय उद्यान हैं- 1. जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान ( Jim Corbett National Park )- स्थापना- 1936 ई०  प्रारंभिक नाम- हैली राष्ट्रीय उद्यान स्थान- नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल क्षेत्रफल- 520.82 वर्ग किलोमीटर विशेषता-

उत्तराखंड के वन्य जीव अभ्यारण्य/वन्य जीव विहार (Wildlife Sanctuary of Uttarakhand)

उत्तराखंड के वन्य जीव अभ्यारण्य/वन्य जीव विहार (Wildlife Sanctuary of Uttarakhand) उत्तराखंड के वन्य जीव अभ्यारण्य/वन्य जीव विहार उत्तराखंड में कुल 7 वन्य जीव अभ्यारण्य ( वन्य जीव विहार) हैं। ये निम्नलिखित हैं- 1. गोविन्द वन्य जीव विहार (Govind Wildlife Sanctuary)- गोविन्द वन्य जीव विहार जनपद उत्तरकाशी में 485 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है।

उत्तराखंड के प्रमुख बुग्याल

बुग्याल- उत्तराखण्ड के हिमालयी क्षेत्रों में पर्वतों की तलहटी पर जहाँ टिम्बर रेखा (पेड़ों की पंक्तियाँ) समाप्त हो जाती हैं, वहाँ से हरे मखमली घास के मैदान आरम्भ होने लगते हैं। आमतौर पर ये 8 से 10 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित होते हैं। हिमालय में स्थित इन्हीं मुलायम घास के मैदानों को बुग्याल

उत्तराखंड की प्रमुख झीलें/ताल (Lake’s of Uttarakhand)

पृथ्वी पर जल-        पृथ्वी पर सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला पदार्थ जल है। पृथ्वी के 70 प्रतिशत भाग में जल है। कुल जल की मात्रा का 97.3 प्रतिशत (135 करोड़ घन किमी0) सागर और महासागर के रूप में तथा 2.7 प्रतिशत (2.8 करोड़ घन किमी0) बर्फ से ढका है। इसके

उत्तराखंड की नदियों के किनारे स्थित प्रमुख नगर/तीर्थ

उत्तराखंड की नदियों के किनारे स्थित प्रमुख नगर/तीर्थ नगर/तीर्थ    –     नदी देवप्रयाग- अलकनंदा और भागीरथी विष्णुप्रयाग – अलकनंदा और विष्णु गंगा नंदप्रयाग- अलकनंदा और नन्दाकिनी कर्णप्रयाग- अलकनंदा और पिंडर नदी रुद्रप्रयाग- अलकनंदा और मंदाकिनी ऋषिकेश- गंगा और चंद्रभागा कालसी- यमुना और टोंस टिहरी- भागीरथी और भिलंगना अगस्त्यमुनि- द्युलगाड़ और मंदाकिनी जौलजीवी- गोरी

उत्तराखंड की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थल

उत्तराखंड की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थल नदी का नाम- उद्गम स्थल भागीरथी- गौमुख (गंगोत्री हिमशिखर) नंदाकिनी- नंदा घुंघटी केदारगंगा- थलय सागर भिलंगना- खतलिंग हिमशिखर (टिहरी गढ़वाल)         पिंडर- पिंडारी हिमखण्ड अलकनंदा- अलकापुरी हिमनद  धौलीगंगा- (देववन हिमानी) नीति  मंदाकिनी- सतोपंथ तथा खरक हिमखंड यमुना- बन्दरपूूँछ चोटी (यमुनोत्री हिमखण्ड) टोंस नदी- हर की

उत्तराखंड के प्रमुख नदी संगम स्थल

उत्तराखंड के प्रमुख नदी संगम स्थल  नदियाँ              –                 संगम स्थल विष्णुगंगा व अलकनन्दा-   विष्णुप्रयाग पिंडर व अलकनन्दा-   कर्णप्रयाग मंदाकिनी नदी व अलकनन्दा-   रुद्रप्रयाग अलकनन्दा और सरस्वती नदी-   केशवप्रयाग नन्दाकिनी व अलकनन्दा-   नन्द प्रयाग सोनगंगा व मन्दाकिनी-
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