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उत्तराखंड की प्रमुख झीलें/ताल (Lake’s of Uttarakhand)

पृथ्वी पर जल- 

      पृथ्वी पर सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला पदार्थ जल है। पृथ्वी के 70 प्रतिशत भाग में जल है। कुल जल की मात्रा का 97.3 प्रतिशत (135 करोड़ घन किमी0) सागर और महासागर के रूप में तथा 2.7 प्रतिशत (2.8 करोड़ घन किमी0) बर्फ से ढका है। इसके अतिरिक्त 7.7 घन किमी0 जल भूमिगत है।

झील-

       भूमि से घिरे विशालकाय जलाशय को झील कहते हैं। अपनी ‘भूगोल: एक समग्र अध्ययन’ पुस्तक में महेश कुमार बर्णवाल लिखते हैं- “पृथ्वी के धरातल के मध्य स्थित जलीय भाग को झील कहते हैं। “

 उत्तराखंड की प्रमुख झीलें

भीमताल-कुमाऊं की सबसे बड़ी झील

(क) कुमाऊं क्षेत्र की झीलें /ताल-

      कुमाऊं की सर्वाधिक झीलें नैनीताल क्षेत्र में हैं। 

1. भीमताल- 

यह कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी झील है, इसकी लम्बाई 1674 मी., चौड़ाई 447 मी.और गहराई 26 मी. है। इसका आकार त्रिभुजाकार है और यह तीन ओर से पर्वतों से घिरा है। इसका रंग गहरा नीला है। इस झील के बीच में एक टापू है, जिस पर मछलीघर है। इस झील से सिंचाई हेतु छोटी-छोटी नहरें निकाली गई है। 

2. नैनीताल-

नैनीताल नगर के मध्य में स्थित इस झील को स्कन्दपुराण में ‘त्रि-ऋषि सरोवर’ कहा गया है, इसकी ऊंचाई समुद्रतल से 1,937 मीटर है, झील के चारों ओर ऊँचे-ऊँचे सात पहाड़ है, जिस में सबसे ऊंचा चाइना पीक या नैना पीक है। इसके उत्तरी भाग को मल्लीताल तथा दक्षिणी भाग को तल्लीताल कहा जाता है। इस झील की लम्बाई 1500 मी., चौड़ाई 510 मी. और गहराई 26 मी. है। नैनीताल की खोज 1841 में सी. पी. बैरन ने की थी। झीलों की अधिकता के कारण नैनीताल को झीलों की नगरी या सरोवर नगरी भी कहते हैं।

3. नौकुचियाताल- 

समुद्रतल से 1292 मी. की ऊंचाई पर स्थित यह कुमाऊं क्षेत्र की सबसे गहरी झील है। इस झील की लम्बाई 936 मी., चौड़ाई 680 मी.और गहराई 40 मी. है। यह झील पक्षियों के निवास के लिए उत्तम है। इस झील के 9 कोने हैं, इसीलिए इसे नौकुचियाताल कहा जाता है। 

4. सातताल-

समुद्रतल से 1288 मी. की ऊंचाई पर स्थित सात ताल कुमाऊं क्षेत्र की सबसे सुंदर झील है। इस झील की गहराई 19 मी. है। यहां पर पहले 7 झीलें थीं, लेकिन वर्तमान में कई सुख गई हैं। इन में नल दमयंती ताल, गरुड़ या पन्ना ताल, पूर्ण ताल, लक्ष्मण ताल व राम-सीता ताल प्रमुख हैं।

5. खुर्पाताल-

समुद्रतल से 1635 मी. की ऊंचाई पर स्थित यह ताल नैनीताल व कालाढूंगी मार्ग पर स्थित है और तीनों ओर से पहाड़ियों से घिरा है। इस ताल की लम्बाई 1633 मी. व चौड़ाई 5 किमी. है। इसका रंग गहरा हरा है। इसका आकार जानवर के खुर के समान है। इसीलिए इसे खुर्पाताल कहा जाता है।

6. झिलमिल ताल-

यह चंपावत के टनकपुर-ब्रहम्देव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस ताल की परिधि लगभग 2 किलोमीटर है। इसका आकार गोलाकार तथा जल का रंग नीला है।

7. श्याम ताल-

चंपावत जिले में स्थित इस ताल की परिधि 2 किमी. है। इसका रंग गहरा श्याम है। इस ताल में श्वेत कमल पुष्प भी खिलते हैं। इसके किनारे पर स्वामी विवेकानंद आश्रम स्थित है, यहां का झूला मेला प्रसिद्ध है।

8. तड़ाग ताल-

यह ताल अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह ताल 1 किमी. लंबा व आधा किमी. चौड़ा है। इस ताल के निचले भाग से पानी की निकासी हेतु पांच सुरंगें बनाई गई हैं, जिनमें से तीन सुरंगें बंद हैं।

9. द्रोण सागर-

उधम सिंह नगर के काशीपुर से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस ताल के पास द्रोण गुरु ने अपने शिष्यों को धनुर्विद्या की शिक्षा दी थी।

10. गिरि ताल-

उधम सिंह नगर के काशीपुर में यह ताल स्थित है। यहां चामुंडा, संतोषीमाता, नागनाथ व मनसा देवी के मंदिर हैं।


सहस्त्रताल- गढ़वाल की सबसे बड़ी झील

(ख) गढ़वाल क्षेत्र की झीलें/ताल-

गढ़वाल क्षेत्र की सर्वाधिक झीलें चमोली जनपद में हैं।

1. सहस्त्र ताल-

टिहरी गढ़वाल के घुत्तु में लगभग 6000 मीटर की ऊंचाई पर सहस्त्र ताल कई तालों का समूह है। इन तालों में तीन मुख्य हैं। सहस्त्रताल गढ़वाल क्षेत्र की सबसे बड़ी और गहरी झील है।

2. महासरताल- 

सहस्त्रताल की कुछ दूरी पर बालगंगा घाटी में स्थित यह झील जो दो कटोरीनुमा तालों से निर्मित है । ये दोनों ताल भाई-बहनों के ताल कहे जाते हैं। इस झील के चारों तरफ घने वृक्ष और बुग्याल (घास के मैदान) स्थित हैं।

3. बासुकीताल-

बासुकीताल टिहरी गढ़वाल के उत्तर पूर्व केदारनाथ के पश्चिम में स्थित लाल पानी वाला यह अनूठा ताल है। इसके लाल पानी की कथा बासुकीनाग से संबद्ध है। यह 4150 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ताल नीले रंग के कमल पुष्प के लिए प्रसिद्ध है।

4. मंसूर ताल-

यह ताल टिहरी गढ़वाल की सीमा के पास खतलिंग ग्लेशियर के ठीक सामने स्थित है। यही से दूधगंगा नदी का उद्गम स्थल है। यह 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, इसकी परिधि 3 किलोमीटर है। कई पर्यटकों को यहाँ ‘राजहंस’ दिखे हैं। 

5. रूपकुंड-

चमोली जिले के थराली विकासखंड के बेदनी बुग्याल में स्थित इस झील का निर्माण शिव-पार्वती ने कैलाश जाते हुए किया था। ऐसा लोककथाओं में कहा गया है। यहां से त्रिशूली और नंदाघुंघटी की पहाड़ियां दिखती हैं। इस कुंड के आस-पास बहुत सारे मानव कंकाल मिले हैं, जिस कारण इस ताल को ‘कंकालीताल’ भी कहते हैं। 

6. हेमकुंड ( लोकपाल )-

चमोली में स्थित इस झील के किनारे सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह ने तपस्या की थी। यह सरोवर अलकनंदा की सहायक नदी लक्ष्मण गंगा का उद्गम स्थल है। यह झील सात पर्वतों से घिरी हुई है। यहाँ एक प्रसिद्ध गुरूद्वारा और लक्ष्मण का मंदिर है। 

7. सतोपंथ ताल- 

यह चमोली जनपद के बद्रीनाथ से 21 किमी. उत्तर-पश्चिम में समुद्र तल से 1334 मी. की ऊंचाई पर स्थित एक त्रिकोणीय ताल है। मान्यता है कि इसके तीनों कोनों पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने तपस्या की थी। यह झील अलकनंदा नदी का उद्गम स्थल है। इस झील के पास सूर्य कुंड और चंद्र कुंड दो ताल स्थित हैं। 

8. शरवदी ताल ( गांधी सरोवर )-

यह रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ मंदिर से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सन् 1948 में महात्मा गांधी जी की अस्थियां यहीं प्रवाहित की गई थी। इसलिए इसे गांधी सरोवर भी कहते हैं । इसका एक अन्य नाम भी है और वह है, ‘चौराबाड़ी ताल।’

9. बेनीताल- 

चमोली जिले में 3000 मी. की ऊंचाई पर स्थित इस झील की लम्बाई 320 मी. और चौड़ाई 150 मी. है। इसके निकट नंदादेवी मंदिर स्थित है।

10. नचिकेता ताल-

नचिकेता ताल उत्तरकाशी शहर से 32 किलोमीटर दूर घने जंगल में स्थित है। उदलक के पुत्र नचिकेता के नाम पर इस ताल का नाम नचिकेता ताल पड़ा। 

11. फाचकंडी ताल ( बयांताल)- 

फाचकंडी या बयांताल उत्तरकाशी जिले में स्थित है। इस झील का पानी उबलता रहता है।

12. देवरिया ताल-

रुद्रप्रयाग जिले में स्थित इस ताल की लम्बाई 1.5 किमी. है। 

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