साथियों, देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है। इसलिए हम सभी को सजग रहने की जरूरत है। वैक्सीन जरूर लगायें और कोविड नियमों का पालन करें। तभी हम स्वयं की व दूसरों की सुरक्षा कर पाने में सक्षम हो पायेेंगे।

Category: सांस्कृतिक आलेख

लोक संस्कृति के कुशल चितेरे: ब्रजेंद्र लाल साह

जन्मदिन विशेष:  लोक संस्कृति के कुशल चितेरे: ब्रजेंद्र लाल साह         रंगकर्मी व रचनाकार ब्रजेंद्र लाल साह का जन्म 13 अक्टूबर, 1928 को अल्मोड़ा में हुआ था। आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ग्रहण की और विशेषकर हिंदी कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास आदि विधाओं में अपनी लेखनी चलाई। शैलसुता, अष्टावक्र और गंगानाथ

पिथौरागढ़ की विशिष्ट लोक नाट्य परंपरा: हिलजात्रा 

पिथौरागढ़ की विशिष्ट लोक नाट्य परंपरा: हिलजात्रा          पिथौरागढ़ जनपद के सोर घाटी में लगभग 400 सालों से हिलजात्रा लोक उत्सव की परंपरा चली आ रही है। वर्षा ऋतु के आगमन पर स्थानीय निवासियों के द्वारा सामूहिक रूप से इसका आयोजन किया जाता है। हिलजात्रा कृषि से जुड़ा लोकोत्सव है, जिसमें स्थानीय

पहाड़ की सौगात: लिंगुड़े की सब्जी

पहाड़ की सौगात: लिंगुड़े की सब्जी       उत्तराखंड न सिर्फ एक ऐसा राज्य है जहां प्राकृतिक सौंदर्य अपनी विशेषताएँ लिए हुए है, बल्कि यहाँ अनेकानेक जड़ी बूटियों के भंडार भी मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है चौमास (बरसात) के दिनों यानि आजकल मिलने वाली प्रसिद्ध सब्जी लिंगुड़ा (linguda)।      लिंगुड़ा का

दुदबोलि के उन्नायक: मथुरादत्त मठपाल

साथियों, कुमाउनी भाषा-साहित्य के अनन्य सेवक मथुरादत्त मठपाल जी का विगत 9 मई को निधन हो गया। मठपाल जी का कुमाउनी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह आलेख उन्हीं को समर्पित-  दुदबोलि के उन्नायक: मथुरादत्त मठपाल      कुमाउनी के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले संपादक व रचनाकार मथुरादत्त मठपाल का

प्रो.शेर सिंह बिष्ट: गोल्ड मेडल से हिंदी विभागाध्यक्ष तक की यात्रा

श्रद्धेय गुरू व साहित्यकार प्रो. शेर सिंह बिष्ट का 19 अप्रैल, 2021 को निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य एवं शिक्षा क्षेत्र की अपूरणीय क्षति हुई है। यहाँ प्रस्तुत है प्रो. बिष्ट के शैक्षिक व साहित्यिक योगदान का संक्षिप्त विवरण- प्रो. शेर सिंह बिष्ट: गोल्ड मेडल से हिंदी विभागाध्यक्ष तक की यात्रा जन्म और

श्री लक्ष्मी भंडार, हुक्का क्लब की रामलीला 

श्री लक्ष्मी भंडार, हुक्का क्लब की रामलीला      साथियो, यदि कोरोना वायरस न फैला होता तो आजकल पूरे देशभर में रामलीला के मंचन से माहौल राममय हुआ रहता। हमारे कुमाऊं अंचल में रामलीला नाटक के मंचन की परंपरा का इतिहास 160 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इसी परंपरा में अल्मोड़ा जनपद के श्री

शेखर जोशी की गलता लोहा कहानी और गणनाथ कालेज के वे पुराने दिन

शेखर जोशी की गलता लोहा कहानी और गणनाथ कालेज के वे पुराने दिन         साथियों आज हम आपको शेखर जोशी की कहानी के माध्यम से ले चलते हैं अल्मोड़ा के ताकुला ब्लॉक में स्थित गणानाथ मंदिर व गणानाथ इंटर कॉलेज की ओर…        साथियों, कक्षा 11 की एन सी ई

आज मनाया जा रहा है संपूर्ण कुमाऊँ में लोकपर्व खतड़ुवा

आज मनाया जा रहा है संपूर्ण कुमाऊँ में लोकपर्व खतड़ुवा    ‘खतड़ुवा’ पशुधन की समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाने वाला कुमाऊँ का प्रमुख लोकपर्व है। इस दिन पशुओं को भरपेट हरी घास खिलायी जाती है। शाम के समय घर की महिलाएं खतड़ुवा (एक छोटी मशाल) जलाकर उससे गौशाला के अन्दर लगे मकड़ी के

मीनाक्षी खाती की ऐपण राखियाँ- बहना के प्यार में लोक-समाज और संस्कृति की मिठास

मीनाक्षी खाती की ऐपण राखियाँ– बहना के प्यार में लोक-समाज और संस्कृति की मिठास          बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है… और इस प्यार में अपने लोक, समाज और संस्कृति की मिठास घुली हुई हो तो और कहना ही क्या ! जी हाँ हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड

राष्ट्रीय पर्व घोषित हो हरेेेेला ( Harela: National festival should be declared )

लोकपर्व: हरेला- राष्ट्रीय पर्व घोषित हो हरेेेेला  समय रहते मनुज यदि अब भी, पर्यावरण हित न सोचेगा। घृणित अक्षरों से लिखा इतिहास उसको धिक-धिक कह नोचेगा।।        शशांक मिश्र भारती की उपर्युक्त पंक्तियां पर्यावरण के प्रति मनुष्य को सचेत करती हैं। आधुनिक समय में पर्यावरण तेजी से बदल रहा है और पर्यावरण असंतुलन
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