कठिन नहीं कोई भी काम, हर काम संभव है। मुश्किल लगे जो मुकाम, वह मुकाम संभव है - डॉ. पवनेश।

उत्तराखंड : संक्षिप्त परिचय

उत्तराखंड:संक्षिप्त परिचय

1. राजनैतिक परिचय-

         उत्तरांचल का गठन 9 नवम्बर, 2000 को देश के 27 वें तथा हिमालयी राज्यों के क्रम में 11 वें राज्य के रूप में किया गया। 31 दिसंबर, 2006 तक इसका नाम उत्तरांचल रहा, तत्पश्चात् 1 जनवरी, 2007 से इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। वर्तमान में उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊँ दोनों मंडलों में कुल 13 जनपद हैं। इसकी राजधानी देहरादून है। उत्तराखंड की प्रथम राजकीय भाषा हिंदी और द्वितीय राजकीय भाषा संस्कृत ( जनवरी, 2010 से ) है। उत्तराखंड के दो विधानसभा भवन हैं, पहला देहरादून तथा दूसरा भराड़ीसैण ( गैरसैंण )। उत्तराखंड की प्रथम विधानसभा का प्रथम सत्र 9 जनवरी, 2001 से प्रारंभ हुआ। ( नोट- उत्तराखंड के अलावा जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र राज्यों के भी दो विधानसभा भवन हैं। ) उत्तराखंड में लोकसभा सीटों की कुल संख्या 5 और राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 3 है। 

         उत्तराखंड का उच्च न्यायालय नैनीताल में स्थित है। इसकी स्थापना भी 9 नवंबर, 2000 को को की गई। यह देश का 20 वां उच्च न्यायालय है। 

2. भौगोलिक परिचय-

        उत्तराखण्ड देश के उत्तर-पश्चिम और हिमालय पर्वत के पश्चिम-मध्य भाग में स्थित एक आयताकार राज्य है। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 28° 43’ उ. अ० से 31°27’ उ०अ० और रेखांश 77°34’ पू. से 81°02’ पू के बीच में 43,483 वर्ग किमी है, जिसमें से 43,034 कि.मी. भाग पर्वतीय है और 7,448 कि.मी. भाग मैदानी है तथा 34,651 कि.मी. भू-भाग वनाच्छादित है। राज्य का अधिकांश उत्तरी भाग वृहद्तर हिमालय श्रृंखला का भाग है, जो ऊँची हिमालयी चोटियों और हिमनदियों से ढका हुआ है, जबकि निम्न तलहटियाँ सघन वनों से ढकी हुई हैं। 

         राज्य के कुल क्षेत्रफल में पर्वतीय भाग 88% और मैदानी भाग 12% है। राज्य के कुछ क्षेत्रफल में गढ़वाल मण्डल का भाग 60.67% और कुमाऊँ मण्डल का भाग 39.33% है। उत्तराखंड का सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला जिला 

       यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 150 से 200 सेमी० तक होती है। यहाँ का फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

3. सांस्कृतिक परिचय-

         उत्तराखण्ड की संस्कृति इस प्रदेश के मौसम और जलवायु के अनुरूप ही है। कुमाऊँ, गढ़वाल और जौनसार क्षेत्र यहाँ की संस्कृति के प्रमुख केन्द्र हैं। संस्कृति के विकास के लिए देहरादून में वर्ष 2004 में ‘संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद’ की स्थापना की गई। उत्तराखंड में 2 आकाशवाणी केंद्र हैं, पहला अल्मोड़ा में और दूसरा पौड़ी में। यहाँ 3 आकाशवाणी रिले केंद्र (गोपेश्वर, उत्तरकाशी व चमोली) भी हैं। राज्य में चित्रकला के सबसे प्राचीनतम शैलचित्र लखु, ग्वारख्या, किमनी, ल्वैथाप, हुडली, फलसीमा, पेटशाल आदि प्रागैतिहासिक गुफाओं से मिले हैं। 

         16 वीं से 19 वीं सदी तक राज्य में गढ़वाल शैली की चित्रकला का प्रचलन था। इस शैली के प्रमुख चित्रकार मोलाराम तोमर ( 1743-1833 ई० ) रहे हैं। उत्तराखंड लोककला और लोकसाहित्य दोनों दृष्टियों से काफी समृद्ध रहा है। राजुला-मालूशाही यहाँ की सर्वाधिक लोकप्रिय लोकगाथा और झोड़ा-चांचरी, न्यौली, झुमैलो, ऐंपण यहाँ की लोकप्रिय कलाएँ हैं। राज्य का ‘अल्मोड़ा’ जिला अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण सम्पूर्ण विश्व में ‘सांस्कृतिक नगरी’ के रूप में प्रसिद्ध है। 

 

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