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पहाड़ की सौगात: लिंगुड़े की सब्जी

पहाड़ की सौगात: लिंगुड़े की सब्जी       उत्तराखंड न सिर्फ एक ऐसा राज्य है जहां प्राकृतिक सौंदर्य अपनी विशेषताएँ लिए हुए है, बल्कि यहाँ अनेकानेक जड़ी बूटियों के भंडार भी मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है चौमास (बरसात) के दिनों यानि आजकल मिलने वाली प्रसिद्ध सब्जी लिंगुड़ा (linguda)।      लिंगुड़ा का

पहाड़ों में इन दिनों: असौज लागि रौ रे भुला

 पहाड़ों में इन दिनों: असौज लागि रौ रे भुला        “ए ब्वारि ऊनी किलै नि खड़्यूनी ! दिन भरि टी० भी० चैबेर हुछई ! असौज लागि रौ। तौ टी० भी०- सी० भी० खित भ्यार। धान चुटन हैरईं। तुकैं टी०भी० हैरै।” सासुल ब्वारि थैं कौ।        ब्वारिल टी०वी० बटन बंद करौ

शिक्षक : संसार के निर्माता

शिक्षक इस जगत के असली निर्माता हैं “जय शिक्षक जय ज्ञान के दाता जय हो तुम्हारी जय जय हो।” भक्तिकालीन संत कबीरदास जी ने कहा है कि गुरू सम दाता जग में कोई नहीं। अर्थात गुरू के समान दाता यानी देने वाला कोई नहीं है। गुरू अर्थात शिक्षक ही है जो अपने ज्ञान से व्यक्ति
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