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हेमंत कांडपाल की कुमाउनी कविताएँ

हेमंत कांडपालकि कुमाउनी कविता            1. प्रकृति प्रकृति हमरि सबु हबै ठुल ईज आज हमु हबे रिस्यै गे ।  कै दयो का धार, कै आग जौस घाम कै हयूं पड़रौ मौत ल्यूडि प्रकृति बेलगाम। रिसी-काव, स्याव बणों बैं हरैगि प्रकृति में सबै तरफ़ कोहराम।  प्लास्टिकक जहर घोई है जाग-जाग हमूकै दिण

ज्योति तिवारी काण्डपाल की कुमाउनी कविताएँ

ज्योति तिवारी काण्डपालकि कुमाउनी कविता              १. मीं एक चेलि छीं एक तरफ चेलि अंतरिक्ष में पुंज गेईं। वैज्ञानिक ले मंगलयान, तीसर चन्द्रयानक् तैयारी में छन । डीएम, एसपी, लेफ्टिनेंट, सचिव पदों पर लै चेलि छन। यां तक कि प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश पद तक पुंज गईं। हर रोज अघिल

सुन्दर लाल मदन की कुमाउनी कविताएँ

सुन्दर लाल मदनकि कुमाउनी कविता                      १. पोलेथीन दार किनारा पोलेथीन, गाड़ गध्यारा डाबोटीन। धरती येल पाटी जैली, कसीक ह्वेली नाजबाली। की करून हेमी भोव दिन।  तोड़ो धैं तोड़ो जरा, तोड़ो धैं, अपण नीन।  नानू नान पौध पत्त,  हाय सहनी भौत कष्ट। ख्यण छा तीम यो

संतोष जोशी की कुमाउनी कविताएँ

 संतोष जोशीकि कुमाउनी कविता              १. डोईण दे अरे डोई छौं मैं डोइण दे यौ देशौं वु देशु बहिण दे।  पौ भरि जै ज्यूनि यौ भागि मायालो पराण तीस बुझिण दे।  अरे डोई छौ मैं डोईण दे।  क्वाखनि जौस लुकिछैं किलै घुनाओनि मुनई टेक्यौं छै किलै निकौव भतेर बै भ्यार

देव सती की कुमाउनी कविताएँ

देव सतीकि कुमाउनी कविता         १. पहाड़ै बात हरि भरि सारा म्येरि पहाड़ों की धारा दिन बानरूल रात सुवरूक उज्जाड़ा गर्मिक दिनों में पाणिक मारमारा खेत बाजि हैगीं हरि भरि सारा के कुनू ददा आपुण बाता दिन नै चैना नींद नै राता जंगोव कटिगी महल बनिगी आब नै रैगी खेत सीढ़ीदारा धोंतिले

ललित शौर्य की कुमाउनी कविताएँ

 ललित शौर्य कि कुमाउनी कविता             १. शब्द ब्रह्म हुनि मैं लड़ते रूंल आज, भोल और पोर ही जाणेक तुम गोलि चलाला मैं कलम चलूल तुम मकें मार सकछा मेर शब्दन कै नी मार सकला कभै किलैकि शब्द  ब्रह्म हुनी और यो बात ध्यान धरिया जो ब्रम्ह छू उ अमर छू….। 
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