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शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ कुमाउनी कविता पुरस्कार 2021 से डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा होंगे सम्मानित

शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ कुमाउनी कविता पुरस्कार 2021 से डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा होंगे सम्मानित

       अल्मोड़ा, कुमाउनी साहित्य में इस वर्ष का शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ कुमाउनी कविता पुरस्कार कुमाउनी कवि डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा को दिया जाएगा। कविता पुुुरस्कार हेतु चयनित समिति के सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के बाद डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा (चंपावत) का नाम घोषित किया गया। डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा को यह पुरस्कार ‘कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति’ कसारदेवी, अल्मोड़ा व ‘पहरू’ कुमाउनी मासिक पत्रिका द्वारा आगामी 25, 26, 27 दिसम्बर 2021 को बागेश्वर में आयोजित होने वाले तीन दिनी 13 वेें ‘राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन’ में दिया जाएगा। पुरस्कार के रूप में उन्हें पांच हजार एक सौ रू. की नकद धनराशि, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जायेगा। यह जानकारी समिति सचिव व ‘पहरू’. संपादक डॉ. हयात सिंह रावत ने दी। 

पुरस्कार के विषय में-

शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ कुमाउनी कविता पुरस्कार

    कुमाउनी कवि शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ के नाम पर स्थापित शेर सिंह बिष्ट ‘अनपढ़’ कुमाउनी कविता पुरस्कार वर्ष 2009 से प्रत्येक वर्ष कुमाउनी के एक श्रेष्ठ कवि को प्रदान किया जाता है। पुरस्कार के रूप में पांच हजार एक सौ रू० की नकद धनराशि, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। वर्ष 2009 से अब तक इस पुरस्कार से पुरस्कृत होने वाले कुमाउनी कवि निम्नलिखित हैं-

1. वर्ष- 2009 : गोपाल दत्त भट्ट
2. वर्ष- 2010 : महंत त्रिभुवन गिरि
3. वर्ष- 2011 : जगदीश जोशी
4. वर्ष- 2012 : रतन सिंह किरमोलिया
5. वर्ष- 2013 : डॉ. शेर सिंह बिष्ट
6. वर्ष- 2014 : जुगल किशोर पेटशाली
7. वर्ष- 2015 : मथुरादत्त मठपाल 
8. वर्ष- 2016 : देवकी महरा
9. वर्ष- 2017 : दामोदर जोशी ‘देवांशु’
10. वर्ष- 2018 : हीरा सिंह राणा
11. वर्ष- 2019 : मोहन चंद्र जोशी

विजेता के विषय में-

डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा

  डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा कुमाउनी भाषा के सक्रिय लेखक हैं। 02 जून 1954 को चंपावत जिले के खर्ककार्की गाँव में जन्मे डॉ. कीर्तिबल्लभ शक्टा कुमाउनी में गद्य व पद्य में लेखन करते हैं। सेवानिवृत्त संस्कृत शिक्षक डॉ. शक्टा की कुमाउनी में ‘राष्ट्र सिपै पहरू’ (नाटक, 2019 ई.) और कुमाऊं के प्रसिद्ध न्यायकारी देवता गोलज्यू पर केंद्रित ‘न्यायमूर्ति गोरल’ (महाकाव्य, 2016 ई. ) नामक दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।

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