नंदू की प्रेमिका नंदू जब गाँव से शहर आया तो उसने अल्मोड़ा में एक किराए का कमरा लिया। यहाँ उसने डिग्री कालेज में बी०ए० में एडमिशन लिया और आगे की पढ़ाई करने लगा। सच तो यह कि नंदू और मैंने साथ ही कालेज में एडमिशन लिया और एक ही कमरे
एक बिल्ले की प्रेमकथा “म्याऊँ… म्याऊँ…. बिल्लो रानी कहो तो अभी जान दे दूं….”- डब्बू बिल्ला पूसी बिल्ली को मनाने के लिए यह गीत गा रहा था, लेकिन पूसी पर गीत का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था। तब डब्बू बिल्ले ने गीत के कुछ शब्दों में परिवर्तन करके यह गीत
एक असफल प्रेमी की प्रेमकथा आज मैं पूरे बत्तीस साल का हो गया हूँ। साथ-ही- साथ एक अकलमंद और सयाना लौंडा भी। इसलिए आज मैं पूरे होशो-हवास में यह निर्णय ले रहा हूँ कि आज के बाद मैं किसी कुंवारी लड़की की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखूंगा और ना ही किसी कन्या के सामने प्रणय
नीली साड़ी वाला चांद जब मैं छोटा बच्चा था तो रात को मां से चांद दिखाने की जिद किया करता था। माँ मना करती तो मैं रोने लगता था। मजबूर होकर माँ को चांद दिखाने मुझे छत पर ले जाना पड़ता था। तब माँ मेरा मुंह चांद की ओर करके गुनगुनाती थी- “चंदा मामा आ
हमसाया “तुम ! यहाँ भी।” “हाँ, बिल्कुल ! जहाँ तुम, वहाँ मैं।” “अच्छा, ऐसा है क्या ?” ” बिल्कुल, तुम्हारा हमसाया जो हूँ।” “चुप पागल !” और ऐसा कहते ही वह खिल उठी। सूरजमुखी नहीं थी वह और न था वह सूरज, फिर भी न जाने क्यों उसके आते